बच्चों को बहुत गुस्सा आता है? शांत करने के 7 आसान तरीके

 बच्चों को बहुत गुस्सा आता है? शांत करने के 7 आसान तरीके

"मेरा बच्चा छोटी-सी बात पर चिल्लाने लगता है।" "मना करो तो चीज़ें फेंक देता है।" अगर आपके घर में भी ऐसा होता है, तो आप अकेले नहीं हैं। कक्षा 1 से 10 तक के बच्चों के माता-पिता की यह सबसे आम शिकायतों में से एक है।

ज़्यादातर माता-पिता इसे बदतमीज़ी मान लेते हैं और डाँट या सज़ा से गुस्सा दबाने की कोशिश करते हैं। लेकिन इससे गुस्सा खत्म नहीं होता, बस अंदर दब जाता है और किसी और मौके पर फिर फूटता है। बाल मनोविज्ञान के अनुसार बच्चे का गुस्सा अक्सर एक संकेत होता है कि वह कुछ महसूस कर रहा है, जिसे वह शब्दों में कह नहीं पा रहा। इस लेख में हम समझेंगे कि बच्चों को गुस्सा क्यों आता है, गुस्से के समय क्या नहीं करना चाहिए, और वे 7 तरीके जिनसे आप घर में शांति ला सकते हैं।

बच्चों को गुस्सा क्यों आता है?

1. भावनाओं को शब्द देना नहीं आता। बड़े अपनी बात कह सकते हैं, पर बच्चे के पास "मुझे बुरा लगा" या "मैं निराश हूँ" जैसे शब्द कम होते हैं। जब शब्द नहीं मिलते, तो भावना चिल्लाने या चीज़ें फेंकने के रूप में बाहर आती है।

2. थकान, भूख और नींद की कमी। स्कूल, ट्यूशन और होमवर्क के बाद थका हुआ बच्चा जल्दी चिड़चिड़ा हो जाता है। भूखे पेट और कम नींद में बड़ों का भी मूड खराब रहता है।

3. मोबाइल और गेम की आदत। जिन बच्चों को खेलते समय फोन छीना जाता है, वे अक्सर ज़्यादा गुस्सा दिखाते हैं।

4. पढ़ाई और दोस्तों का दबाव। परीक्षा का डर, कम नंबर की चिंता या दोस्तों से झगड़ा भी बच्चे के मन में तनाव भरता है।

5. घर का माहौल। बच्चे वही सीखते हैं जो देखते हैं। अगर घर में बड़े अक्सर चिल्लाते या झगड़ते हैं, तो बच्चा भी गुस्से को ही अपनी बात मनवाने का तरीका समझने लगता है।

6. ध्यान पाने की चाह। कई बार बच्चा सिर्फ यह चाहता है कि आप उसकी तरफ देखें और उसे सुनें।

गुस्से के समय ये गलतियाँ न करें

चिल्लाना या मारना। इससे बच्चा डरकर चुप हो जाता है, पर सीखता यह है कि गुस्से में हिंसा ठीक है।

सबके सामने शर्मिंदा करना। इससे उसका आत्मसम्मान टूटता है और गुस्सा बढ़ता है।

लेबल लगाना। "तू तो हमेशा ऐसा ही है" जैसी बातें बच्चे की सोच बन जाती हैं।

गुस्से के बीच लंबा भाषण देना। गुस्से में बच्चे का दिमाग सुनने की हालत में नहीं होता।

रिश्वत देना। "चुप हो जा, चॉकलेट दूँगा" से बच्चा सीखता है कि गुस्सा करने पर इनाम मिलता है।

गुस्सा शांत करने के 7 आसान तरीके

1. पहले खुद शांत रहें। बच्चे का गुस्सा देखकर आप भी भड़क गए तो आग में घी पड़ जाएगा। एक गहरी साँस लें, आवाज़ धीमी रखें और खुद से कहें, "यह मेरा बच्चा है, दुश्मन नहीं।" आपकी शांति बच्चे को शांत होने का रास्ता दिखाती है।

2. भावना को नाम दें। बच्चे से कहें, "मुझे लग रहा है कि तुम्हें बहुत बुरा लगा क्योंकि मैंने खेलने नहीं दिया।" जब बच्चे को लगता है कि उसे समझा गया, तो गुस्सा आधा हो जाता है। धीरे-धीरे वह खुद कहना सीखता है, "मुझे गुस्सा आ रहा है।"

3. घर में एक शांत कोना बनाएं। एक कोने में तकिया, कुछ किताबें या ड्रॉइंग का सामान रखें। इसे सज़ा की जगह न बनाएं। बच्चे को बताएं कि जब गुस्सा आए तो वह यहाँ जाकर खुद को शांत कर सकता है। आप चाहें तो थोड़ी देर उसके पास बैठ सकते हैं।

4. साँस का खेल सिखाएं। बच्चे से कहें, "सोचो तुम्हारे पेट में गुब्बारा है। नाक से साँस भरकर गुब्बारा फुलाओ, फिर मुँह से धीरे-धीरे हवा निकालो।" इसे 4 से 5 बार दोहराएं। यह खेल शांत समय में भी करवाएं, ताकि गुस्से के समय बच्चे को याद रहे।

5. शांत होने के बाद बात करें। जब बच्चा सामान्य हो जाए, तब पूछें, "क्या हुआ था? अगली बार ऐसा हो तो तुम क्या कर सकते हो?" साफ़ बताएं कि गुस्सा आना गलत नहीं है, पर चीज़ें तोड़ना या किसी को मारना गलत है। गुस्सा करने की जगह गुस्से पर लगाम सिखाना असली लक्ष्य है।

6. गुस्सा निकालने के सही रास्ते दें। बच्चे को ड्रॉइंग बनाना, डायरी में लिखना, दौड़ना, मिट्टी या क्ले से खेलना जैसे तरीके सिखाएं। ये गुस्से की ऊर्जा को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालते हैं।

7. रूटीन और नियम तय रखें। पूरी नींद, समय पर खाना, रोज़ कुछ देर खेल-कूद और स्क्रीन के साफ़ नियम गुस्सा कम करने में बड़ी मदद करते हैं। जब बच्चा गुस्से को संभाले, तो उसकी तारीफ़ करें, जैसे "आज तुमने बिना चिल्लाए अपनी बात कही, मुझे अच्छा लगा।" तारीफ़ से अच्छा व्यवहार दोहराने की इच्छा बढ़ती है।

कब विशेषज्ञ से मिलें?

ज़्यादातर बच्चों में गुस्सा बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा होता है। लेकिन इन हालात में स्कूल काउंसलर या बाल मनोवैज्ञानिक से सलाह लें:

गुस्सा रोज़ और बहुत तीव्र हो

बच्चा खुद को या दूसरों को चोट पहुँचाए

कई महीनों से कोई सुधार न दिख रहा हो

स्कूल से लगातार शिकायतें आ रही हों

मदद माँगना कमज़ोरी नहीं, समझदारी है।

निष्कर्ष

गुस्से वाला बच्चा बुरा बच्चा नहीं होता, वह एक ऐसा बच्चा है जिसे अपनी भावनाएं संभालना सीखना है। यह एक दिन में नहीं होगा। आपको धैर्य रखना होगा और खुद भी वैसा व्यवहार करना होगा जैसा आप बच्चे से चाहते हैं। आज ही इनमें से एक तरीका चुनें, जैसे "भावना को नाम देना", और एक हफ्ते तक आज़माकर देखें। फर्क ज़रूर दिखेगा।

आपके बच्चे को किस बात पर सबसे ज़्यादा गुस्सा आता है? कमेंट में बताइए।

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