बच्चा होमवर्क से क्यों भागता है? कारण और 7 कारगर उपाय
बच्चा होमवर्क से क्यों भागता है? कारण और 7 कारगर उपाय
स्कूल से आते ही बैग एक कोने में, फिर टीवी या मोबाइल हाथ में। "होमवर्क कर लो" कहने पर जवाब आता है, "अभी करता हूँ," और वह "अभी" रात तक नहीं आता। कभी पेट दर्द का बहाना, कभी "कोई होमवर्क मिला ही नहीं।" अगर यह आपके घर की रोज़ की कहानी है, तो आप अकेले नहीं हैं।
ज़्यादातर माता-पिता इसे आलस समझ लेते हैं और चिल्लाकर या डराकर बच्चे को बैठाते हैं। लेकिन होमवर्क से भागने के पीछे अक्सर कोई वजह छिपी होती है। जब तक वह वजह समझ में न आए, रोज़ की लड़ाई चलती रहती है। इस लेख में हम कारण, आम गलतियाँ और होमवर्क को आसान बनाने के 7 तरीके समझेंगे।
बच्चा होमवर्क से क्यों भागता है?
1. थकान और भूख। स्कूल के 6 से 7 घंटे के बाद बच्चे का दिमाग थका होता है। आते ही होमवर्क पर बैठाने से उसका मन बिलकुल नहीं लगता।
2. विषय समझ में न आना। जिस विषय में बच्चा कमज़ोर होता है, उसका होमवर्क उसे बोझ लगता है। वह कहता नहीं, बस टालता है, क्योंकि गलत होने या डाँट पड़ने का डर रहता है।
3. बहुत ज़्यादा या उबाऊ काम। पूरे पन्ने भर-भरकर लिखना और एक ही तरह के सवाल बार-बार करना किसी भी बच्चे को थका देता है।
4. मोबाइल और टीवी का आकर्षण। स्क्रीन पर तुरंत मज़ा मिलता है, जबकि पढ़ाई में मेहनत लगती है। जब स्क्रीन पास में हो, तो पढ़ाई हारती ही है।
5. कोई तय समय और जगह न होना। अगर रोज़ अलग समय पर, कभी बिस्तर पर तो कभी सोफे पर होमवर्क होता है, तो दिमाग को पढ़ाई के लिए तैयार होने की आदत नहीं पड़ती।
6. ध्यान की समस्या। कुछ बच्चों को लंबे समय तक एक जगह बैठकर ध्यान लगाने में सचमुच कठिनाई होती है।
7. माता-पिता की सख़्ती। जब होमवर्क का मतलब रोज़ की डाँट और झगड़ा बन जाता है, तो बच्चा पढ़ाई से ही चिढ़ने लगता है।
8. मदद की चाह। कई बार बच्चा सिर्फ़ यह चाहता है कि आप उसके पास बैठें। होमवर्क से भागना उसका ध्यान पाने का तरीका हो सकता है।
ये गलतियाँ न करें
सिर पर खड़े होकर निगरानी। इससे बच्चा दबाव में आता है और गलतियाँ और बढ़ जाती हैं।
उसका काम खुद कर देना। इससे बच्चा निर्भर बनता है और सीखता कुछ नहीं।
होमवर्क को सज़ा बनाना। "आज खेलना बंद, पहले पढ़ाई" जैसी बातें पढ़ाई को बुरी चीज़ बना देती हैं।
दूसरे बच्चों से तुलना। "देखो उसका होमवर्क तो कब का खत्म हो गया" से बच्चा हतोत्साहित होता है।
देर रात तक बैठाना। थके दिमाग से किया गया काम खराब होता है और नींद भी बिगड़ती है।
होमवर्क की आदत सुधारने के 7 तरीके
1. पहले ब्रेक, फिर पढ़ाई। स्कूल से आकर बच्चे को खाना, पानी और 30 से 45 मिनट का आराम दें। इसमें खेलना या थोड़ी देर बाहर जाना अच्छा रहता है। रिचार्ज हुआ दिमाग पढ़ाई में ज़्यादा ध्यान लगाता है।
2. रोज़ का तय समय और जगह। हर दिन एक ही समय और एक ही शांत कोना चुनिए, जहाँ टीवी और मोबाइल न हों। कुछ दिनों में यह बच्चे की आदत बन जाती है और "आज करूँ या नहीं" की बहस कम हो जाती है।
3. काम को छोटे हिस्सों में बाँटें। अगर होमवर्क ज़्यादा है, तो 20 से 25 मिनट पढ़ाई और 5 मिनट का ब्रेक रखिए। बच्चे के साथ बैठकर सूची बनाइए कि आज क्या-क्या करना है। एक-एक काम पूरा होने पर टिक लगाने से बच्चे को सफलता का एहसास होता है।
4. खुद से करने दें, पर पास रहें। बच्चे के पास बैठिए, लेकिन उसकी जगह काम मत कीजिए। जब वह अटके, तो जवाब बताने की जगह पूछिए, "तुम्हें क्या लगता है, यह कैसे होगा?" इससे वह सोचना सीखता है।
5. कमज़ोर विषय पर अलग से ध्यान दें। अगर बच्चा किसी एक विषय से रोज़ भागता है, तो उसकी बुनियाद कमज़ोर हो सकती है। उसे आसान सवालों से शुरू कराइए, ज़रूरत पड़े तो शिक्षक से बात कीजिए। कभी-कभी सिर्फ़ एक पुरानी बात न समझ पाने से पूरा विषय मुश्किल लगने लगता है।
6. सकारात्मक नियम और छोटे इनाम। नियम साफ़ रखिए: "होमवर्क पूरा, फिर 30 मिनट खेल या मनपसंद काम।" यह रिश्वत नहीं, एक व्यवस्था है। बच्चे को पता होता है कि मेहनत के बाद मज़ा मिलेगा। जब वह बिना याद दिलाए काम पूरा करे, तो उसकी तारीफ़ कीजिए।
7. स्कूल से संपर्क रखें। अगर होमवर्क लगातार बहुत ज़्यादा या बच्चे के स्तर से कठिन लगे, तो शिक्षक से शांति से बात कीजिए। साथ मिलकर रास्ता निकल सकता है। ध्यान रखें कि आप शिकायत नहीं, मदद माँग रहे हैं।
बोनस सुझाव: कभी-कभी पढ़ाई को खेल बनाइए। जैसे गणित के सवाल दुकान का खेल बनाकर करवाना, या याद करने वाली चीज़ को कहानी या गाने में बाँधना।
उम्र के हिसाब से ध्यान दें
कक्षा 1 से 5: बच्चे को आपकी मौजूदगी चाहिए। साथ बैठिए, पर काम उसे करने दीजिए।
कक्षा 6 से 10: धीरे-धीरे ज़िम्मेदारी उसे सौंपिए। उसे अपना टाइमटेबल बनाने दीजिए और आप सिर्फ़ ज़रूरत पर मदद कीजिए।
कब विशेषज्ञ से मिलें?
अगर बच्चा बहुत ज़्यादा परेशान दिखता है, लिखने-पढ़ने में लगातार कठिनाई होती है, अक्षर उलटे लिखता है, या एक जगह 5 मिनट भी नहीं टिक पाता, तो स्कूल काउंसलर या बाल विशेषज्ञ से सलाह लेना ठीक रहेगा। शुरुआती पहचान से बच्चे की पढ़ाई आसान हो सकती है।
निष्कर्ष
होमवर्क से भागने वाला बच्चा हमेशा आलसी नहीं होता। वह थका, उलझा या डरा हुआ भी हो सकता है। जब हम सज़ा की जगह कारण ढूँढते हैं, तो पढ़ाई का माहौल बदलने लगता है। आज से ही एक बदलाव आज़माइए, जैसे स्कूल के बाद 30 मिनट का आराम या रोज़ का तय समय। एक हफ्ते में फर्क महसूस होगा।
आपका बच्चा किस विषय के होमवर्क से सबसे ज़्यादा भागता है? कमेंट में बताइए।
Comments
Post a Comment